मुख्यमंत्री का बयान “गुंडे जेल गए या फिर राम नाम सत्य है की यात्रा पर” हास्यास्पद - सुरेन्द्रनाथ त्रिवेदी


वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी) अजय कुमार वर्मा
लखनऊ 22 अक्टूबर। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश प्रवक्ता सुरेन्द्रनाथ त्रिवेदी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा चुनावी सभाओं मेें दिये गये बयान “गुंडे जेल गए या फिर राम नाम सत्य है की यात्रा पर” को हास्यास्पद बताते हुये कहा कि यदि यही बयान मुख्यमंत्री द्वारा विदेशों में दिया जाता तो शायद वहां के लोग विश्वास कर लेते परन्तु उ0प्र0 में ही इस तरह की बयानबाजी से यह लगता है कि योगी जी पूरे प्रदेश की जनता को मूर्ख अथवा बुद्विहीन या केवल मिटटी की भरी हुयी बोरियां ही समझते हैं। योगी जी को चुनाव आते देख ऐसा प्रतीत होता है कि वह पुनः जनता को बरगला लेंगे लेकिन प्रदेश की जनता के सामने इनका दोहरा चरित्र उजागर हो चुका है। अब इनकी काठ की हाण्डी दुबारा नहीं चढ़ने वाली।
      श्री त्रिवेदी ने कहा कि हाथरस, लखीमपुर, बलिया, बलरामपुर, बाराबंकी, आजमगढ़, फतेहपुर, हरदोई आदि जनपदों की बालिकाओं और मासूम बच्चियों के साथ हुयी दुर्दान्त एवं जघन्य घटनाएं इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में गुण्डाराज कायम है और सरकार का इकबाल खत्म हो चुका है क्योंकि प्रत्येक घटना में सरकार के द्वारा आरोपियों को ही संरक्षण दिया गया है और पीडि़ता अथवा भुक्तभोगी परिवार को दबंगों के साथ साथ सरकार की ओर से भी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है। उन्होंने आगे कहा कि गुण्डे राम नाम सत्य है की यात्रा पर नहीं बल्कि सड़कों और गांवों में खुलेआम ताण्डव कर रहे हैं जिनकी छानबीन करने पर पता चलता है कि वह सभी भाजपा से सम्बन्धित हैं। उ0प्र0 में बहुचर्चित काण्ड उन्नाव और शांहजहांपुर के रहे हैं जिनमें भाजपा के विधायक और केन्द्र सरकार के मंत्रीगण बलात्कार जैसी जघन्य घटनाओं में लिप्त रहे हैं।
      रालोद प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि जिस प्रदेश का मुख्यमंत्री वर्ष में दो बार नवरात्रि की नवमी को कन्यापूजन करता हो उसी की सरकार में प्रदेश के कोने कोने में मासूम बच्चियों और बालिकाओं के साथ साथ महिलाओं पर बलात्कार की घटनाएं हो रही हों और आरोपियों को खुलेआम सरकार का संरक्षण प्राप्त होना बहुत ही शर्मनाक है और मुख्यमंत्री को प्रदेश की सभाओं में इस तरह के झूठे बयान नहीं बोलने चाहिए बल्कि ऐसे अपराधों के लिए प्रदेश की जनता से खुले मंचों से क्षमा मांगनी चाहिए क्योंकि सम्पूर्ण प्रदेश में केवल कानून बचा है और व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है।