किसान खाद के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर, बछरावां पुलिस के छूटे पसीने


वेबवार्ता(न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा/ एस के सोनी  
रायबरेली 21 अगस्त। एक तरफ आवारा जानवर की मार और तो और समय पर सरकार द्वारा यूरिया खाद का उपलब्ध ना होना, किसानों की आय दो गुनी पर बड़े सवाल खड़ी करती है।
जिले के कृषि विभाग के अधिकारी और प्रशासन दोनों पूरी तरह से किसान का सहयोग कर पाने में असफल साबित हो रहे हैं। किसानों को मार्केट से कालाबाजारी में यूरिया खाद 350 रूपए में खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसिया ग्रामसभा के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य राजकुमार चौधरी ने बताया कि वर्तमान सरकार की उदासीनता के कारण ही हम लोग इस महामारी काल में भी यूरिया खाद के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। दो महीने से अधिक समय व्यतीत हो चुका है क्षेत्र की किसी भी सहकारी समिति पर आज तक यूरिया खाद नहीं मिल पाई है। बछरावां के इफको किसान केंद्र पर बछरावां के ही नहीं वरन अगल-बगल के क्षेत्रों के लोग सुबह तीन बजे से ही लाइन लगाकर खाद लेने के लिए आ जाते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ती हुई धज्जियां देखी जा सकती हैं। सुबह से शाम तक इस आशा में लाइन लगाकर हैं कि खाद मिल जाएगी लेकिन अक्सर उनको बिना खाद के भी घर वापस लौटना पड़ता है। एक किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इफको सेंटर पर तैनात सुरक्षाकर्मी खुद ही खाद की कालाबाजारी में संलिप्त होकर अवैध धन उगाही में लगे हुए हैं। मौके मौके पर 270 रूपए की यूरिया खाद 300 रुपए में बेच कर आय का एक जरिया बनाए हुए हैं।


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