केन्द्र ने नेशनल रिकू्रटमेंट एजेन्सी के गठन की घोषणा कर युवा वर्ग को छला -सुरेन्द्रनाथ त्रिवेदी


वेबवार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा
लखनऊ 20 अगस्त। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश प्रवक्ता सुरेन्द्रनाथ त्रिवेदी ने कहा कि केन्द्र सरकार ने नेशनल रिकू्रटमेंट एजेन्सी के गठन की घोषणा करके एक बार पुनः देष के युवा वर्ग को छलने का प्रयास किया है और प्रदेश सरकार द्वारा उसी नीति को प्रदेश में अपनाने की रणनीति तैयार करने में भी बेरोजगारों और युवाओं के साथ भ्रम फैलाने का कुचक्र किया जा रहा है। वास्तविकता तो यह है कि जब सरकारी विभागों और उपक्रमों का ही निजीकरण कर दिया जायेगा तो सरकारी नौकरियों का प्रश्न ही नहीं उठता और इस निजीकरण की शुरूआत केन्द्र सरकार रेलवे तथा एयरपोर्ट जैसे सरकारी संसाधनों द्वारा एक वर्ष पूर्व ही की जा चुकी है।
      श्री त्रिवेदी ने कहा कि प्रदेश में बी0टी0सी0 और बी0एड0 जैसी शिक्षकों की डिग्रियों को प्राप्त करने के बाद भी टी0ई0टी0 परीक्षा होती रही थी। अब उसमें भी सुपर टेट लागू करके सरकार क्या सिद्ध करना चाहती है? जबकि एक शिक्षक के लिए बी0टी0सी0 और बी0एड0 ही शैक्षिक योग्यता की पहचान है। स्पष्ट है कि सरकार ऐसे नियमों का समावेश करती जा रही है कि षिक्षा प्राप्त बेरोजगार युवा विभिन्न परीक्षाओं के दौर से ही गुजरता रहेगा और इसी बीच अपने चहेते चंद लोगों को सेवा में शामिल कर लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार बैंको में आई0बी0पी0एस0 के नाम से एक परीक्षा का आयोजन शुरू किया गया था जिसके माध्यम से कुछ वर्षो तक नौकरियां मिली और अब हजारों बैंक ही समाप्त कर दिये गये तो उस संस्था की प्रासंगिकता स्वयं समाप्त हो गयी।
     रालोद प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि देष और प्रदेश में युवा शक्ति असमंजस की स्थिति से गुजर रही है उसे अपना भविष्य अंधकारमय लग रहा है क्योंकि सरकारों द्वारा लगातार सरकारी उपक्रम एवं सरकारी संसाधन पूंजीपतियों और उद्योगपतियों के हाथों में देने का सतत प्रयास जारी है। केन्द्र सरकार ने सबसे बडे उपक्रम रेलवे के लगभग डेढ सौ स्टेशन निजी हाथों में दे दिये हैं। टेªनों का संचालन भी निजी हाथों में हस्तांरित हो चुका है। हो सकता है कि कोरोना काल में ही सैकडों टेªनों का संचालन भी निजी हाथों में सौप दिया जाय। विद्युत विभाग के निजीकरण की भी प्रक्रिया तेजी से चल रही है यही कारण है कि अधिकारी और कर्मचारीगण आन्दोलित हो रहे हैं। इसी प्रकार प्रदेश में परिवहन विभाग के स्टेशनों और बंद पडी कताई मिलों को भी बेचने अथवा निजी हाथों में देने की तैयारी चल रही है। जबकि 40 लाख बेरोजगार प्रवासी मजदूरों के रूप में ही विभिन्न प्रदेशों से उ0प्र0 में आये हैं और लाखों लोग पहले से ही बेरोजगार है। डबल इंजन की सरकारे इन बेरोजगारों के माध्यम से सभी सरकारी उपक्रम स्वयं संचालित कर सकती है और बेरोजगारी भी दूर हो सकती है यदि सरकारे युवाओं के साथ न्याय करने की भावना से काम करें।


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