जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए संतुष्ट रहना सीखें

जिंदगी को खुशहाल और तनाव से बचाने के लिए जरूरी है कि इसमें कुछ बदलाव किए जाएं, जीवन के हर पहलू को समझकर संतुष्ट रहना सीखें। सकारात्मक सोच को बनाए रखें। बदलाव जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा है, इसे स्वीकार करना ही बेहतर होगा। अपनी जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए कुछ बातों को स्वीकार करें और कुछ को अपनी जिंदगी से हटाएं। एक मिनट के लिए सोचें कि आपके जीवन में कम से कम एक गैरजरूरी चीज कौनसी है और उसे आज ही खत्म कर डालें। इसके लिए कोई ऐसी चीज चुनें जो आप कर सकते हैं और करेंगे। इन छोटे-छोटे कदमों से आपका जीवन रूपांतरित हो सकता है। मगर आपको वास्तव में अपनी सोची हुई चीज पर अमल करना होगा। जो चीज आप छोड़ देते हैं, उसे फिर से प्रकट नहीं होना चाहिए। अगर आप किसी चीज को नष्ट कर रहे हैं, तो उसे हमेशा के लिए खत्म हो जाना चाहिए। जीवन को ध्यान से देखकर यह तय करें कि उसमें कौन सी चीज बदली जा सकती है और फिर इस बारे में कोशिश कीजिए। जैसे, 'हर बार भोजन करने से पहले मैं 10 सेकंड इस भोजन के लिए आभार प्रकट करूंगा, जो मेरा हिस्सा बनने वाला है या हर बार जब मैं किसी अनिवार्य तत्व, जैसे मिट्टी, जल, वायु और बाकी चीजों का इस्तेमाल करूंगा, तो मैं उसके एक फीसदी की बचत करूंगा। ये छोटी-छोटी चीजें आपके जीवन को बदल देंगी और एक अलग शख्सियत प्रदान करेंगी। एक जरूरी चीज जो हर इंसान को याद करनी चाहिए, वह है आप नश्वर हैं। लोगों को यह समझने में पूरी जिंदगी लग जाती है। जीवन के हर क्षण का जश्न मनाना चाहिए और उसका आनंद उठाना चाहिए क्योंकि जीवन एक पल के लिए भी आपका इंतजार नहीं करता। इसलिए इस जीवन में कुंठा, अवसाद, गुस्से या किसी भी अप्रियता के लिए समय नहीं है। हर पल को आनंद लेते हुए व्यतीत करें। जब आप अपने भीतर प्रेम से भरे होते हैं तब आप को सुख मिलता है। इसलिए सभी से प्रेमपूर्वक पेश आएं। प्रेम से भरी दुनिया बनाकर आप किसी और का कल्याण नहीं कर रहे हैं। यह जीने का बुद्धिमानी भरा तरीका है। दुनिया को प्रेमपूर्ण बनाने के लिए आपको कुछ ज्यादा या कम नहीं करना है, जो कुछ भी करते हैं उन्हीं से प्रेमपूर्णदुनिया बना सकते हैं। ज्यादातर लोगों ने अपने जीवन की खुशी, शांति और प्रेम बाहरी हालातों के पास गिरवी रख दी हैं। जब स्टॉक मार्केट ऊपर जाता है, तो आप बेहद खुश होते हैं, वह नीचे आता है, तो आप बेहद दुखी होते हैं। दुनिया में खुशी से जीने की हमारी क्षमता घर के आकार या प्रकार पर निर्भर नहीं है। जीवन का असली गुण तो इससे तय होता है कि आप अपने भीतर कैसे हैं? मनुष्य को सदैव अपने अंदर से खुश रहने का प्रयास करना चाहिए, खुश होने के लिए किसी कारण या मौके की तलाश करने की जरूरत नहीं है। आप सदैव एक चीज को अच्छा मानते हैं और दूसरे को खराब। यह तरीका बिल्कुल भी ठीक नहीं है। आपको अपने भीतर से इस तरह होना चाहिए कि जो चीज जैसी है, आप उसे उसी रूप में देख पाएं। अगर आप किसी चीज को, जैसी वह है, उससे अलग होकर देखते हैं तो इसका मतलब है कि आप अपनी राय और पूर्वाग्रहों से दुनिया में मिलावट करने की कोशिश कर रहे हैं।


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