हेमा मालिनी की राह इस बार आसान नहीं

मथुरा लोकसभा सीट का चुनाव इस बार दिलचस्प हो गया है। पिछले चुनाव में भारी मतों से जीतने वाली अभिनेत्री हेमा मालिनी के लिए इस बार राह उतनी आसान नहीं दिख रही। उनके समक्ष जहां गठबंधन से उतारे गए रालोद प्रत्याशी कड़ी चुनौती पेश करेंगे। वहीं कांग्रेस के ब्राह्मण उम्मीदवार भी मुकाबले को दिलचस्प बनाएंगे। यह पहला चुनाव है जब रालोद ने किसी ठाकुर प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। इस बार के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हेमा मालिनी की साख भी दांव पर है। क्योंकि वह कह चुकी हैं कि इसके बाद कभी चुनाव नहीं लड़ेंगी।  यह चुनाव ‘मिनी छपरौली’ माने जाने वाले मथुरा में रालोद के लिए अस्तित्व बचाने का भी सवाल है। साथ ही गठबंधन प्रत्याशी नरेंद्र्र ंसह के राजनीतिक जीवन की दिशा भी तय करेगा। नरेंद्र्र ंसह अभी तक विधानसभा के तीन चुनाव हार चुके हैं। इस बार चुनाव में तीनों प्रमुख दलों ने अलग-अलग जातियों के प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर, कांग्रेस के साथ उसके प्रत्याशी महेश पाठक के लिए भी यहां चुनौती कम नहीं है। पाठक 2004 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर हार चुके हैं। कांग्रेस से उन्हें दूसरी बार मौका मिला है। मथुरा लोकसभा का इतिहास रहा है कि यहां से कभी ब्राह्मण प्रत्याशी नहीं जीता। देखते हैं इतिहास बदलेगा या दोहराया जाएगा? 


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