चुनाव पूर्व पीएम द्वारा ताबड़तोड़ शिलान्यास केंद्र की हताशा दिखला रहा : कांग्रेस
(वेबवार्ता/अजय कुमार वर्मा)

लखनऊ। आज जिस प्रकार से प्रधानमंत्री जी ने ताबड़तोड़ शिलान्यास करने का तरीका अपनाया है उससे केन्द्र और प्रदेश सरकार की हताशा परिलक्षित होती है। अपने पूरे कार्यकाल के पांच वर्ष में यदि प्रधानमंत्री ने इन योजनाओं में कुछ योजनाएं ही पहले प्रारम्भ कर दी होती तो शायद वह आज धरातल पर आकार के रूप में दिखाई पड़ती और उन योजनाआंे की देर-सबेर पूरी भी होने की संभावना बनती। लेकिन इन्होने सिर्फ आम जनता को एक बार पुनः भ्रमित करने के लिए करोड़ों रूपये की योजनाओं का शिलान्यास करने का मात्र नाटक किया है। 

उ0प्र0 कंाग्रेस कमेटी के प्रवक्ता ओंकार नाथ सिंह ने आज जारी बयान में कहा कि प्रधानमंत्री जी ने आज वाराणसी में विश्वनाथ कारीडोर के शिलान्यास के अवसर पर भाषण की शुरूआत करते हुए कहा कि उन्हें भोलेनाथ जी ने यह कार्य करने के लिए भेजा है। यह सर्वविदित है कि विगत 2014 में जब वाराणसी आये तो इन्होने कहा था कि इन्हें माँ गंगा ने बुलाया है। इन्होेने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी ने भोले बाबा के लिए कुछ नहीं किया। शायद प्रधानमंत्री जी को यह नहीं मालूम कि इस पृथ्वी पर किसी भी व्यक्ति की भोले बाबा के लिए करने की कोई हैसियत नहीं है जो सबका कल्याण करता हो उसके कल्याण की सोचने की बात सिर्फ रावण जैसी सोच रखने वाला ही सोच सकता है। इनकी कार्य की तत्परता इतनी है कि पांच वर्षों में यह गंगा माँ से भोलेनाथ जी तक पहुंच पाये और न ही माँ गंगा की सफाई करा पाये और न ही विश्वनाथ कारीडोर बनवा पाये। वाराणसी की जनता इसे न कभी भूल पायेगी और न ही क्षमा करेगी।  

प्रवक्ता ने कहा कि कानपुर में लखनऊ के मेट्रो के उद्घाटन के अलावा लखनऊ, कानपुर सहित प्रदेश के अनेक शहरों में कई परियोजनाओं का शिलान्यास प्रधानमंत्री ने किया यह शिलान्यास लोगों को सिर्फ भ्रमित करने के लिए ही किया है क्योंकि लोकसभा चुनाव हेतु आचार संहिता लगने में मात्र कुछ दिन या समय ही शेष बचा है ऐसे में यह शिलान्यास विकास के नाम पर सिर्फ जुमला ही है। श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारांे से कोई अनुभव नहीं लिया है और न ही मुख्यमंत्री ने उन्हें बताने का प्रयास किया कि अब तक चुनाव के समय कराये गये शिलान्यास से कोई भी पार्टी विजय नहीं प्राप्त कर सकी है। देश और प्रदेश की जनता प्रत्येक सरकार के पूरे पांच वर्ष के कार्यकाल की समीक्षा करती है तत्पश्चात ही अपना कोई निर्णय लेती है ऐसे में इस सरकार को सोचना चाहिए कि इसने पांच वर्षों में बेरोजगारी, किसानों की समस्या और न्यूनतम समर्थन मूल्य को दुगुना करने के वादे, गन्ना किसानों के बकाये भुगतान के वादे, सरकारी पदांे पर भर्ती के वादे, बिजली के दाम कम करने के वादे, महिलाओं को सुरक्षा देने के वादे, नोटबन्दी के पचास दिन में हालात सुधर जाने के वादे को पूरा न कर पाने को याद करना चाहिए तथा जीएसटी से रोजगार को जो भारी हानि हुई है और लोगों का रोजगार छिन गया है उसको याद करने की जरूरत है।