चुनाव में स्वच्छता  लाने के लिए काम करने वाली एजेंसी एडीआर ने फिर किया अपने सर्वे रिपोर्ट को सार्वजनिक
 लखनऊ (वेब वर्ता /अजय कुमार वर्मा)। उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव को देखते हुए एक बार फिर एडीआर ने अपनी रिपोर्ट पेश की इस रिपोर्ट में आज भी प्रदेश में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार माना जाता है। फिर कानून व्यवस्था और चिकित्सा यह शहरी आंकड़े हैं। वहीं ग्रामीण स्तर पर तीन बड़े मुद्दों में कृषि करने हेतु कर को पहले नंबर पर खेती के लिए बिजली, दूसरे नंबर पर वहीं रोजगार तीसरे नंबर पर बड़ा मुद्दा माना गया है। 

वहीं एडीआर ने अपने सर्वे को पूरे देश में लगभग ढाई लाख से ज्यादा लोगों से की गई बातचीत के आधार पर पेश किया गया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न सवालों के जवाबों से रिपोर्ट को तैयार किया है। एडीआर का दावा जनता में नाराजगी बड़ी है। जनता के बीच में 10 बड़ी समस्याओं में रोजगार स्वास्थ्य पीने का पानी सड़क परिवहन ग्रामीण समस्या सिंचाई का पानी ग्रामीण कृषि हेतु कर्ज सब्सिडी या समर्थन मूल्य एवं कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे आज भी सबसे ज्यादा हावी है। जिन मुद्दों पर आज भी कोई गौर नहीं करना चाहता उसमें भ्रष्टाचार एवं टेररिज्म है, यह किसी के लिए मायने नहीं रखता। एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है की 2007, 2012, 2017 में अपराधिक छवि के प्रत्याशियों की स्थिति के साथ उनकी संख्या भी बढ़ी। जिसमें 70% लोगों की संपत्ति भी कई गुना बढ़ गई। इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में यह भी दावा किया है कि सभी बड़े दलों ने महिलाओं की हिस्सेदारी के लिए कोई खास रुचि नहीं दिखाई। इस हिसाब से अभी तक 10% से ज्यादा महिलाओं की स्थिति कभी नहीं बढ़ी। जनता में भी अब अपने प्रत्याशी को लेकर जागरूकता बढ़ी है, और वह भी जानती है कि करप्शन के क्षय ऐसे मानक हैं जिस आधार पर वह वोट करता है। जिसमें दारू मुर्गा पैसा जाति धर्म किस पार्टी का प्रत्याशी है, मुख्यमंत्री कौन होगा। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि जब जनता से यह पूछा गया कि क्या इस दिशा में सरकार प्रयास कर रही है कि रोजगार कानून व्यवस्था चिकित्सा कृषि बिजली आदि को बेहतर बनाने कार्य कर रही है तो जनता ने इसका बड़ा ही स्पष्ट संकेत दिया कि नहीं तीन वर्गों में पूछे गए सवाल के जवाब का लोगों ने 10 में से ढाई प्रतिशत माना कि एक आम हो रहा है एवं 7. 5 का मानना है कि सरकार इस और कोई कदम नहीं उठा रही।