चुनाव के समय केन्द्र द्वारा अयोध्या में भूमि अधिग्रहण कार्यवाही केवल लाभ लेने की मंशा- मायावती
                  

लखनऊ वेबवार्ता/अजय कुमार वर्मा। केन्द्र में बीजेपी की वर्तमान सरकार को केवल जातिवादी, साम्प्रदायिक व धार्मिक उन्माद, तनाव व हिंसा आदि के साथ-साथ संकीर्ण राष्ट्रवाद की नकारात्मक व घातक नीति व कार्यकलापों के आधार पर संविधान मंशा विरोधी तरीके से सरकार चलाने का आरोप लगाते हुये बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा कि इनका अयोध्या भूमि विवाद के सम्बंध में अधिग्रहित भूमि का भूभाग रामजन्म भूमि न्यास को वापस लौटाने हेतु माननीय सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देने की कल की कार्रवाई भी जबर्दस्ती सरकारी हस्तक्षेप के साथ-साथ लोकसभा आमचुनाव से पूर्व चुनाव को प्रभावित करने की नीयत वाला ऐसा ही संकीर्ण सोच का विवादित कदम है जिससे देश की आमजनता को बहुत ही सावधान रहने की ज़रूरत है। वैसे भी मा. सुप्रीम कोर्ट की मिल्कियत वाली अधिगृहित भूमि में यथा-स्थिति को बिगाड़ने का सरकारी प्रयास अनुचित व भड़काऊ भी है। घोर चुनावी स्वार्थ की राजनीति के तहत यह बीजेपी सरकार का यह नया चुनावी हथकण्डा है।

अयोध्या मामले पर केन्द्र सरकार की कल की ताजा कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये मायावती ने कहा कि देश में जबर्दस्त गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी व अशिक्षा आदि के सम्बन्धित व्यापक जनहित, जनकल्याण व देशहित से जुड़े राष्ट्रीय समस्याओं तथा बहु-चर्चित इनके के मामले में भी बुरी तरह से केन्द्र सरकार की विफलताओं के साथ-साथ इनकी घोर चुनावी वादाखिलाफी के कारण देश की सवा सौ करोड़ आमजनता का विश्वास खोकर इनमें बदनाम भी हो चुकी बीजेपी सरकार के पास अब इनका अयोध्या व धर्म के अन्य मामलों का गलत व राजनीतिक इस्तेमाल का आखिरी हथकण्डा बाकी रह गया था जो बीजेपी अब पूरी तरह से इस्तेमाल करने में लग गई है। इनके इसी प्रकार की राजनीति से देश की जनता बुरी तरह से पीड़ित, प्रताड़ित व त्रस्त है, लेकिन बीजेपी को अभी भी लगता है कि यही अब इनके पास आखिरी हथकण्डा मात्र बचा है और वह इस प्रकरण मंे तरह-तरह से हांथ-पाँव मारने में लगी हुई है, जिसमें आमजनहित व देशहित बिल्कुल भी निहित नहीं है। वैसे बीजेपी को अब यह भी लग गया है कि उत्तर प्रदेश में बसपा व सपा गठबंधन के कारण वह केन्द्र की सत्ता में दोबारा वापस आने वाली नहीं है। इससे भी घबराकर व बौखलाहट में केन्द्र व उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार अब वह सभी हथकण्डे इस्तेमाल करने मंे लग गई है जिसकी उम्मीद संविधान के आाधार पर चलने वाली किसी भी निर्वाचित सरकार से देश की आमजनता कतई नहीं कर सकती है तथा बीजेपी सरकार का कल का मा. सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया कदम ऐसा ही एक गलत सरकारी हस्तक्षेप वाला गै़र-संवैधानिक कदम लगता है जिसमंे संकीर्ण राष्ट्रवाद साफ तौर पर उसी प्रकार से निहित है जिस प्रकार से इनके अन्य फैसलों व खासकर में समाहित है और जिसके खिलाफ बीजेपी-शासित असम राज्य सहित पूरे पूर्वोत्तर भारत के प्रदेशों में वहाँ की आमजनता काफी ज्यादा आन्दोलित है तथा सड़को पर संघर्षरत है और बीजेपी सरकार जिनको ’’देशद्रोही’’ बताकर उनके संघर्ष को कुचलने का हर प्रकार से अलोकतांत्रिक प्रयास कर रही है।